सहकारिता में नई उम्मीदों की दस्तक, आमेरा की पहल से तेज हुए सुधार के संकेत

जयपुर। प्रदेश के सहकारिता तंत्र में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में अब ठोस पहल के संकेत मिलने लगे हैं। सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नवनियुक्त शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार (सहकारिता) डॉ. समित शर्मा से मुलाकात कर न सिर्फ बधाई दी, बल्कि सहकारी ढांचे में सुधार का एक स्पष्ट रोडमैप भी सामने रखा।
मुलाकात औपचारिक जरूर थी, लेकिन इसके केंद्र में सहकारिता क्षेत्र की जमीनी चुनौतियाँ और उनके समाधान की ठोस रणनीति रही। आमेरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सहकारी संस्थाओं की मजबूती बिना पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन के संभव नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार पर बकाया बड़ी राशि के भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सहकारी बैंकों पर लंबित सैकड़ों करोड़ रुपये के भुगतान को जल्द जारी कराने की मांग करते हुए कहा गया कि इससे बैंकिंग व्यवस्था में नई ऊर्जा आएगी और किसानों व आम उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप योग्य अधिकारियों की नियुक्ति, पैक्स से लेकर अपैक्स स्तर तक निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई और रुकी हुई वसूली प्रक्रियाओं को फिर से शुरू करने जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से रखा गया।
आमेरा ने यह भी स्पष्ट किया कि सहकारी बैंकों में स्टाफ की कमी, भर्ती प्रक्रिया में देरी और वेतन विसंगतियाँ कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कैडर सिस्टम लागू करने और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
मुलाकात के दौरान डॉ. समित शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए सहकारिता क्षेत्र में सुधार के लिए सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने लंबित मामलों के समाधान के लिए उच्च स्तर पर पहल करने और संगठन के साथ जल्द विस्तृत बैठक आयोजित करने का भरोसा दिलाया।
इस मुलाकात को सहकारिता क्षेत्र में संभावित बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि उठाए गए मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई होती है, तो प्रदेश की सहकारी व्यवस्था न केवल मजबूत होगी, बल्कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।

