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एक्शन मोड में सहकारिता विभाग पंजीयक कार्यालय : जिला प्रभारी व्यवस्था की एक दशक बाद वापसी

सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) कार्यालय ने करीब एक दशक बाद 41 जिला प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति की है। इनका मुख्य उद्देश्य मासिक दौरों और समीक्षा के जरिए सहकारी संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता और गति लाना है।

जयपुर | 26 फरवरी

प्रदेश में सहकारी आंदोलन को नई ऊर्जा देने और ज़मीनी स्तर पर सहकारी संस्थाओं के कामकाज की नियमित निगरानी के लिए सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) कार्यालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। लगभग एक दशक के लंबे अंतराल के बाद, विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों में ‘जिला प्रभारी अधिकारियों’ की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। इसके लिए सहकारिता विभाग पंजीयक (Registrar) कार्यालय के अतिरिक्त रजिस्ट्रार (द्वितीय) संदीप खण्डेलवाल द्वारा जारी इस सूची में 41 वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन प्रभारियों में अतिरिक्त रजिस्ट्रार, संयुक्त रजिस्ट्रार और उप रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है।

विभाग का मुख्य उद्देश्य अधीनस्थ कार्यालयों के कार्यों की समीक्षा करना और सहकारी संस्थाओं की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाना है। जारी आदेश के अनुसार, इन सभी प्रभारी अधिकारियों को महीने में कम से कम एक बार अपने आवंटित जिले का अनिवार्य रूप से दौरा करना होगा। वही दौरे पर जाने से पहले अधिकारियों को रजिस्ट्रार से अपना यात्रा कार्यक्रम अनुमोदित करवाना होगा और विज़िट के बाद अपनी विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करनी होगी।

प्रभारियों की इस सूची में भोमाराम को नागौर, संजय पाठक को पाली और जितेन्द्र प्रसाद को जैसलमेर जैसे महत्वपूर्ण जिलों का जिम्मा दिया गया है। इसी तरह प्रदेश के नवगठित जिलों जैसे फलौदी, दूदू और ब्यावर में भी समन्वय के लिए प्रभारियों की तैनाती की गई है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से सहकारिता विभाग की योजनाओं का लाभ सीधे समितियों और किसानों तक पहुँचाने में तेज़ी आएगी।

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