
जालोर (विश्व सेवक समाचार)–
राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार का असर अब जिले में गहराता जा रहा है। 27 फरवरी से जिले भर की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) में कार्यरत कार्मिक अपनी मांगों को लेकर ऋण वितरण, वसूली और पैक्स कंप्यूटराइजेशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का पूर्ण बहिष्कार कर रहे हैं तथा विभागीय स्तर पर दो दौर की वार्ता विफल होने के बाद, जिले में कार्यरत करीब 15 पैक्स कार्मिकों ने ‘कार्यवाहक ऋण पर्यवेक्षक’ के पद से सामूहिक रूप से असमर्थता जताते हुए अपने त्यागपत्र सौंप दिए हैं।ये कार्मिक केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के निर्देशन में अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे थे। कर्मचारियों का तर्क है कि जब तक उनकी प्रदेश स्तरीय मांगें पूरी नहीं होती, वे अतिरिक्त उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने की स्थिति में नहीं हैं तो इस गतिरोध पर जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक (JCCB) प्रबंधन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। बैंक प्रशासन का मानना है कि चूंकि मांगें राज्य स्तर की हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर कार्यों को बाधित करना उचित नहीं है। _बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जिन कार्मिकों ने वर्तमान संकट के समय अपने पद से त्यागपत्र दिया है, उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या अतिरिक्त पदभार नहीं सौंपा जाएगा_ वही प्रशासनिक कार्य सुचारू रखने के लिए बैंक के अधिशाषी अधिकारी द्वारा एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। इसके तहत जिले के सभी शाखा प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने नियमित पदीय कर्तव्यों के साथ-साथ आगामी आदेशों तक अपने क्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी (ऋण पर्यवेक्षक/सहायक अधिशाषी) के कर्तव्यों का भी निर्वहन करेंगे *जबकि वर्तमान में जिले की समितियों के स्तर पर मिनी बैंक, खाद विक्रय और राशन वितरण जैसे आवश्यक कार्य तो निष्पादित किए जा रहे हैं, लेकिन ऋण प्रबंधन और कंप्यूटरीकरण का काम ठप होने से किसानों और सहकारी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है।




